मै पुलिस विभाग की बात करता हूँ यहाँ भी बहुत ज्यादा भ्रस्टाचार फैला है। यदि किसी गरीब व्यक्ति को एक ऍफ़ .आई.आर (प्रथम सूचना प्रतिवेदन) लिखवाना होता है पहले तो ये पुलिस विभाग के लोग सीधे मुह बात नहीं करते है जाने क्यों ये अपनी वर्दी में अपने आप को भगवान् समझते है इनकी मानवता तो बिलकुल मर चुकी है शायद इन्हें इस विभाग में आने से पहले इसी बात की ट्रेनिंग मिलती है यदि पीड़ित व्यक्ति व्यक्ति उनसे विनती करता है की ऍफ़ .आई.आर (प्रथम सूचना प्रतिवेदन) दर्ज कर ले तो पुलिस वाले कहते है साले भाग जाओ नहीं तो लाक उप में बंद कर दुगा जमानत भी नहीं होगी ये ऐसा गरीब तबके के लोगो के साथ ही करते है और वो बेचारा वहा से जाने पर मजबूर हो जाता है। ऐसे मामलो मामलो में पुलिस वाले अक्सर अपराधी व्यक्ति से सुविधा शुल्क ले लेते है और पीड़ित व्यक्ति न्याय से वंचित रह जाता है। यदि पीड़ित व्यक्ति भाग दौड़ कर ऊपर के अधिकारियो को अपनी समस्या बताता है तब जाकर कही उसकी ऍफ़ .आई.आर (प्रथम सूचना प्रतिवेदन) दर्ज हो पाती है। आखिर क्यों इतने भ्रस्ट है ये पुलिस विभाग के लोग!और गरीब पीड़ित व्यक्ति की समस्याओ को क्यों नहीं समझते है!
विद्धुत विभाग की बात ले ले यहाँ भी बहुत भ्रस्टाचार फैला हुआ है अभी हाल की ही बात है मेरे एक मित्र को बिजली का नया आवेदन करना था वो बिजली विभाग गए की भाई नया कनेकसन लेना है कितना खर्चा आयेगा। विधुत विभाग का कर्मचारी बोलादेखो भाई वैसे तो सरकारी तौर पर नया आवेदन का ४२००-४५०० का खर्चा आता है मगर आपको ६०००-६५०० रूपये देने होंगे मैंने बोला भाई जब ४५०० का खर्च है तो ६५०० रूपये क्यों ?बिजली विभाग का कर्मचारी बोला अरे भाई ये सुविधा शुल्क है मेरे मित्र बोले वो किस लिए विधुत विभाग का कर्मचारी बोला अरे भाई आपकी सुविधा के लिए मेरे मित्र बोले वो कैसे ?कर्मचारी बोला यदि आपको जल्दी कनेकसन चाहिए तो इतना तो देना ही होगा मै बोला २००० रूपये पुरे आप लोगो! वो बोला नहीं भाई जे.ई साहब है एस.डी.ओ साहब है कंप्यूटर वाले भईया है सभी को बराबर बराबर से जायेगा तभी तो आपका जल्द ही कनेक्सन होगा नहीं तो आपको बार बार विभाग के चक्कर लगाने होंगे इसलिए तो आपसे ये सुविधा शुल्क लिया जा रहा है। ताकि आपको सुविधा मिल सके ! मै अन्दर से तो बहुत गुस्सा हुआ की २००० रूपये मुझे फालतू में देने होंगे इनकी बातो को तो मै रिकॉर्ड कर ही चूका था मैंने सोचा भ्रस्टाचार में फसवा दू ।
फिर मैंने सोचा आखिर बाद में दिक्कत तो मुझे ही होगी मैंने ६५०० रूपये देकर आवेदन फॉर्म भरकर वह से चला आया। और मैंने देखा की मेरे मित्र का कनेक्सन बहुत जल्द ही हो गया। एक अन्य मामले में देखा ४५००००/-रूपये का बिल आया उपभोक्ता का लेनदेन की बात हुई उपभोक्ता से और केवल ३००००/-रूपये में ही उसका मामला निस्तारित कर दिया गया यहाँ तक की कंप्यूटर से उसकी सारी लीगल एंट्री ही गायब कर दिया गया वाह रे भ्रस्टाचार !
नगर निगम विभाग ये भी बिलकुल भ्रष्ट विभाग है यहाँ भी पूर्ण रूप से भ्रस्टाचार फैला हुआ है एक मामले में मै अपने मकान का असेसमेंट कराने के लिए गया बाबु से बात हुए भाई हाउस टैक्स जमा करना है बाबु बोला रजिस्ट्री या विल की कॉपी लाओ तब होगा खैर मै अपने पिता जी की विल को लेकर गया बाबु ने देखा बोला पिता जीवित है मै बोला हाँ बाबु बोला तब तो यह असेसमेंट नहीं हो पायेगा! मै बोला क्यों नहीं होगा बोला उनके जीवन काल में ये नहीं हो सकता है मृत्यु के उपरांत ही हो पायेगा मै बोला भाई मेरे पिता ये प्लाट मुझे दे चुके है आपको क्या दिक्कत है मुझे लाइट का कनेक्सन चाहिए बाबु बोला अच्छा किसी दिन शाम को आओ फिर बात करता हूँ। मै एक दिन शाम को गया मैंने बोला क्या हुआ भाई असेसमेंट का? बाबु बोला भाई हो जायेगा पर बड़ा टेड़ा मामला है कुछ सुविधा शुल्क देना होगा मैंने कहा कितना बोला जोड़ कर बताता हूँ फिर बोला यही कोई ८०००/- रूपये का खर्चा आयेगा मैंने कहा इतना कैसे ? बोला करीब ४५०० तो आपका गृहकर बनेगा बाकि का हम लोग लेगे मैंने कहा कुछ कम कर लो बोला नहीं बिलकुल सही बता दिया है सिर्फ मै नहीं लुगा इसमें नगर निगम इंस्पेक्टर,जोनल अधिकारी,कंप्यूटर वाले,और कुछ बाबुओ को भी देना होगा खैर मैंने उन्हें ८०००/-रूपये की रकम जब दे दी तब ही मेरा असेसमेंट का काम हो पाया था तो ये नगर निगम के भ्रस्टाचार की कहानी है !
अब मै आपको न्याय प्रणाली की और ले चलता हूँ ! सन २००२ में मैने अपनी अधिवक्ता की प्रक्टिस शुरू किया मै अपने मित्र के साथ एक ३०२ के मुक़दमे में जाना था मेरे मित्र बोली ज्ञान भाई आज इस मामले को मै समाप्त कर दुगा। मैंने कहा कैसे ?अभी तो गवाही भी नहीं हुई है वो बोले नहीं सारी डील हो चुकी है मुवक्किल से ५००००/-रूपये लिए है मै बोला आप तो महगे अधिवक्ता बन गए ?वो बोले नहीं इसमें कई लोगो को शेयर करना है २५०००/-रूपये जज साहब का है। १००००/- रूपये सरकारी अधिवक्ता का है ५०००/-में गवाह तोडना है बाकि के मेरे होगे। मै अदालत गया और देखा की जैसा मेरे मित्र अधिवक्ता ने कहा था वैसा ही निर्णय हुआ। ३०२ का मुजरिम छूट गया सारा केस ही समाप्त हो गया। मै हैरान हो गया की क्या ऐसा भी हो सकता है!तो ये है हमारे देश की न्याय प्रणाली जो अब भर्स्ट हो चुकी है यहाँ मै ये बात सभी जज के लिए लागु नहीं कर रहा हूँ हमारे देश में कुछ महान जज भी हुए है जिन्हें भगवान् का दर्जा मिला हुआ है।
जारी..............
